गुरुवार, 8 सितंबर 2016

जो तुम ना जाते !

आज जो तुम चले गए , कल किसको रोकेंगे
आँखों के दरपन में एक धुँधली सी तसवीर है,
बीत जायेगा वक्त और ठहर जाएगी मंज़िल,
इश्क़ के दर पर हर अकेला फ़कीर है ।

मौला भी झुकता है बंदे की हक़ीक़त के आगे,
आज़ाद दिल की हर ख्वाइश नायाब  है,
ढोंग कर के क्या मिलेगा ओ पगले,
उसके रोशन दर  पे सबका सीधा हिसाब  है ।

सोती रात जब जागती है आँखों से,
सुबह होने की बेकरारी उसे नहीं होती,
लमहा ठहर जाता है अंगड़ाईयाँ ले कर,
इंतेज़ार -ऐ - वक़्त की बेशुमारी उसे नहीं होती ।

मासूम होती है आँखों से कही बातें,
शब्दों की बनावट से दुर एक दम सच्ची,
कास समझ जाते तुम जो बात कह गए,
ना जाते छोड़ हमें जैसे कोई डोर कच्ची ।

                                                             



                                                                                                                 -स्नेहिऌ
                                                                     

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