शनिवार, 14 मई 2022

ये काफ़ी कितना होता है ?

क्या बारिश की बूंदे काफी हैं गागर को भरने के लिए ?

क्या तिनके का सहारा काफी है सागर को तरने के लिए ?

ये काफी कितना होता है!

मन कचोट हृदय रोता है | 


नंगी हथेली एक सिक्के को छूने भर को तरसती है | 

ना काफी उसके बटुए में समायी वो अमीरों की बस्ती है | 

ये काफी कितना होता है !

जो आँसुओं से हथेलियाँ धोता है | 


ऊँचे उसके ख्वाब मगर मजबूर है वो ना जाने क्यों | 

धूल उड़ाता ज़मीं पर दूर उसका आसमाँ है ये माने क्यों | 

ये काफी कितना होता है !

जो बेवजह ख़ुद को खोता है | 


दूसरों की नज़र से देख अगर तो तेरा काफी पूरा है | 

वो दूसरा बैठा सिर झुकाए अपने हालात से अधूरा है | 

ये काफी कितना होता है !

जो चैन से रातों को सोता है | 




                                                                           

                                                      -  नेहा 







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