मिले कई मुझे मुझ जैसे |
मन की मेरी मान लू मैं तो ,
जान लू खुद को मैं वैसे |
है कौन नया हुआ कौन पुराना ,
असली नकली का भेद बताना |
मारे ताली गाये गाना
हँसता खुद पे अंधा जमाना |
मन यहाँ अभी कल कहाँ किधर है ,
समय कि बड़ी कसी कमर है |
दौड़ समय के साथ हांफती ,
उम्मीद अधूरी अजर अमर है |
लो समझ गया सब खेल निराले ,
चमक दमक पर मन के काले |
रहस्य यही बस सच बोल दे तू जो ,
दिल सोना और सब दिलवाले |
पलट कर पन्ना नई कहानी से जब तू कुछ लिख जायेगा ,
मुड़ कर बचपन ऊंगली थामे साथ तेरे फिर आएगा |
देख कर मेरे मन की काया आईना भी मुस्कायेगा ,
पढ़कर अपनी नयी कहानी तू खुद को जान जायेगा |