शुक्रवार, 31 अगस्त 2018

रास्ता |

मैं अकेला ही चलूंगा , मिल जाएगी मंज़िल मुझे
रास्तों के पत्थरों से टूटना नहीं मुझे 
हर कदम पे एक कदम हो हौसला हासिल मुझे 
धुँधले उम्मीदों की कमान से छुटना नहीं मुझे || 

पैदल चलूँगा कंकरो पे धुप भी सहूँगा मैं ,
वो रास्ता लम्बा सही उसपर चलता रहूँगा मैं 
सकले बनाती दुनिया मुझे डरा रही हर घड़ी 
तू आज़मा ले मेरी हिम्मत ये सदा कहूँगा मैं || 


ये काफ़ी कितना होता है ?

क्या बारिश की बूंदे काफी हैं गागर को भरने के लिए ? क्या तिनके का सहारा काफी है सागर को तरने के लिए ? ये काफी कितना होता है! मन कचोट हृदय रोत...