मैं अकेला ही चलूंगा , मिल जाएगी मंज़िल मुझे
रास्तों के पत्थरों से टूटना नहीं मुझे
हर कदम पे एक कदम हो हौसला हासिल मुझे
धुँधले उम्मीदों की कमान से छुटना नहीं मुझे ||
पैदल चलूँगा कंकरो पे धुप भी सहूँगा मैं ,
वो रास्ता लम्बा सही उसपर चलता रहूँगा मैं
सकले बनाती दुनिया मुझे डरा रही हर घड़ी
तू आज़मा ले मेरी हिम्मत ये सदा कहूँगा मैं ||
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